Skip to main content

साभार - हिन्दुस्तान


Comments

Popular posts from this blog

17 साल बाद फिर बनेंगे रैबीज के टीके! वर्ष 1997 में नैनीताल के पटवाडांगर स्थित जैव प्रौद्योगिकी संस्थान में बना था रैबीज का आखिरी टीका  प्रौद्योगिकी संस्थान ने हैदराबाद की कंपनी से सैद्धांतिक अनुबंध किया नीरज कुमार जोशी , नैनीताल । यदि सब कुछ ठीक-ठाक  रहा तो इस वर्ष से नैनीताल के निकटवर्ती पटवाडांगर स्थित जैव प्रौद्योगिक संस्थान में 17 साल बाद फिर से रैबीज की वैक्सीन बनेंगी। संस्थान ने यहां टिश्यू कल्चर तकनीक से वैक्सीन उत्पादन के लिए हैदराबाद की विवीमेड लैब कंपनी से पीपीपी मोड के तहत सैद्धांतिक अनुबंध किया है। पटवाडांगर स्थित जैव प्रौद्योगिक संस्थान वर्ष 1903 में निर्मित ब्रिटिशकालीन भवन में स्थापित किया गया था। पूर्व में यह रैबीज, डिपथीरिया और टिटेनेस के टीके बनाने के लिए संयुक्त उत्तर प्रदेश का एकमात्र संस्थान था। यहां से निर्मित वैक्सीन पूरे उत्तर प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में सस्ती दरों में उपलब्ध कराई जाती थी। 1997 में विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के नियमों में बदलाव आने के बाद यहां भेड़ों के मस्तिष्क में उपस्थित कोशिकाओं से वैक्सीन बनाने पर रोक लगा द...

आशा डेंटल क्लीनिक के नाम एक और उपलब्धिः चिकित्सकों की संयुक्त टीम ने बिना चीरे सर्जरी कर 72 घंटे के भीतर लगाया फिक्स जबड़ा

नैनीताल। टीम नैनीताल खबरनामा नैनीताल के प्रतिष्ठित डेंटल क्लीनिक आशा डेंटल क्लीनिक के नाम एक और उपलब्धि जुड़ी है। यहां के चिकित्सकों ने कार्टिकोबेसल इम्लान्ट सर्जरी के माध्यम से बोन क्राफट तकनीक का उपयोग कर यह इलाज करने में सफलता हासिल की है। आशा डेंटल क्लीनिक के निदेशक डा. पंकज सिंह ने बताया कि पहले इस तरह के इलाजों के लिए लोगों को बरेली या दिल्ली स्थित अस्पतालों के चक्कर लगाने पड़ते थे। लेकिन आशा डेंटल क्लीनिक की इस पहल से लोगों को नैनीताल शहर में ही यह सुविधा मिल रही है। नैनीताल निवासी 60 वर्षीया महिला अस्पताल से मिले इलाज से काफी संतुष्ट हैं। चिकित्सकों की संयुक्त टीम ने इस इलाज को किया। इसमें आशा डेंटल क्लीनिक के डा. पंकज सिंह समेत डा. रूद्राक्ष पंत, डा. रितिक जोशी, डा. नेहा पाठक शामिल रहे। टेक्निशियन पूरन बिष्ट ने सहयोग किया।